बुधवार, 12 मई 2021

मरती इंसानियत

      
                                चित्र -गूगल से साआभार

"डॉक्टर मेरी मम्मी की हालत बहुत खराब है प्लीज एडमिट कर लीजिए"

डॉक्टर "इनका आरटी पीसीआर करवाया आपने"

"जी पॉजिटिव है,, आज शाम ही रिपोर्ट आयी है और इनकी तबियत भी काफी खराब हो गयी है"

डॉक्टर "देखिये हमारे पास बेड तो है नहीं लेकिन आप कुछ एक्सट्रा पैसे दे तो हम देखेंगें कुछ हो सका तो "

"डाॅक्टर प्लीज आप बेड अरेन्ज करके इलाज करिये पैसे हम सारे भर देगें"

डाॅक्टर "वार्ड बॉय इनको वार्ड नम्बर 5 मे एडमिट कर दीजिए" और लड़के की तरफ देखकर "आप आॅक्सीजन सिलेन्डर का भी इन्तजाम कर लीजिए हमारे पास ज्यादा आॅक्सीजन है नहीं "

लड़का "जी ठीक "

वो एक तरफ अपनी माँ को एडमिट करवाके आॅक्सीजन सिलेंडर लेने भाग। बड़ी मुश्किल से पैसों का इन्तजाम करके एक सिलेन्डर 30000 में ले आया। पैसों की बड़ी समस्या थी लेकिन किसी तरह इन्तजाम कर लिया आखिर माँ की जान पर बन आयी थी। 

अगले दिन माँ का अॉक्सीजन लेवल गिरा तो सिलेन्डर ने माँ की साँसें उखड़ने से बचा ली ये देखकर उसकी जान में जान आयी और इतना पैसा लगाना भी काम आ गया। 
इसी बीच डॉक्टर आये और लड़के से बोले "इन्हें रेमेडिसिविर के इन्जेक्शन लगाने होंगें और हमारे पास सारे इन्जेक्शन खत्म हो चुके हैं तो तुम बाहर से खरीद लाओ"

लड़का फिर से मेडिकल स्टोर के चक्कर काटने लगा। लगभग 15 मेडिकल स्टोर पर दौड़भाग करने के बाद किसी के बताने पर वो एक मेडिकल स्टोर पर पहुँचा और बोला "भईया रेमडिसिविर इन्जेक्शन दे दो"

मेडिकल स्टोर वाले ने उसकी तरफ तिरछी निगाहों से देखा और बोला "एक ही तो बचा है" और दूसरी साइड खड़े आदमी की ओर इशारा करके बोला "ये पन्द्रह हजार दे रहे हैं,, लेकिन तुम सोलह दे दो तो तुम ले जाओ"

इन्जेक्शन का दाम सुनकर लड़के के चेहरे पर निराशा फैल गयी। उसने जल्दी से अपने जेब से अपना पर्स निकला और उसमें रखे पैसे गिनने लगा। कुल मिलाकर 6 हजार रूपये थे उसके पास। 

तुरन्त ही उसने एक दो जगह कॉल किया लेकिन कुछ इन्तजाम नहीं हुआ। फिर उसने आशा भरी नजरों से मेडिकल स्टोर वाले को को देखा और बोला "भईया प्लीज मेरी मम्मी की तबियत बहुत खराब है और अभी मेरे पास सिर्फ 6 हजार रूपये ही बचे हैं। आप मुझे इन्जेक्शन दे दो ना.... मैं बाकी के पैसे भी आपको दो चार दिन में दे दूँगा"

मेडिकल स्टोर वाला "हाँ.. हाँ मैं तो यहाँ खैरात बाट रहा हूँ ना...जाओ पूरे पैसे लेकर आओ और इन्जेक्शन ले जाओ"

लड़का वहाँ से जल्दी से किसी रिश्तेदार के घर की तरफ भागा। अभी वो आधे रास्ते में ही था कि हॉस्पिटल से फोन आया कि उसकी माँ की साँसे चलना बन्द हो गयी हैं। उसकी माँ चली गयी। इतना सुनते ही लड़के के तो हाथ पैर सुन्न पड़ गये। 

कुछ देर बाद खुद को सम्भाल कर वो बेचारा किसी तरह वहाँ से वापस हॉस्पिटल आया और उनके अन्तिम संस्कार की तैयारी में लग गया। जान पहचान और रिश्तेदार तो कोरोना की वजह से पहले ही पीछे हट गये। जब वो श्मशान घाट पहुँचा तो वहाँ भी उसका नम्बर दस लोगों के बाद था। 

ऐसी हालत में बेचारा क्या करता फिर से लाइन में लगकर अपनी बारी का इन्तजार करने लगा...

ऐसे ही ना जाने कितने लोग लाइन में लगे हैं किसी को हास्पिटल में बेड चाहिए, किसी को दवा,  किसी को अॉक्सीजन तो किसी को श्मशान घाट पर जगह लेकिन कालाबाजारी और भ्रष्टाचार खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही। ऐसी हालत में भी लोग महिलाओं से हॉस्पिटल में भी छेड़छाड़ करने से बाज नहीं आ रहे। 
 इन्सान अब इन्सान नहीं गिध्द हो गया है ऐसा गिध्द जो जीवित लोगों को नोच -नोचकर खाने के तैयार खड़ा है... 

बुधवार, 5 मई 2021

क्या मुझे वो स्नेह मिल सकेगा..?

मैं दिन रात तुम्हारे ख्यालों में खोया रहता हूँ 
तुम्हें देखकर जीता हूँ और तुम पर ही मरता हूँ
तुम ही मेरे एहसासों में समाई हो 
तुमसे प्यार ही मेरे जीवन भर की कमाई है
तुम्हारी एक झलक के लिए हम बेकरार हैं
कैसे कहें कि कितना तुमसे प्यार है
तुम्हारे बिन तो ये जीवन भी बेकार है
क्या तुम्हें इन बातों का इल्म है?
तुम्हारे इन्तजार मैं बस आहें भरता हूँ
मन्दिर मस्जिद गुरूद्वारा हर जगह माथा टेक आया 
लेकिन तुम्हारे आने का कुछ पता नहीं 
इश्क़ किया है तुमसे इतनी बड़ी तो ये खता नहीं 
गर खता है भी तो आकर सजा दे दो
कम से कम इन एहसासों को समझकर 
इनको खत्म करने की ही वजह दे दो
अगर मैं भुला पाया इन एहसासों को 
तो तुम्हारा मुझ पर अहसान होगा 
और ना भुला पाया तो 
तुम्हें एक नजर देखकर जीना आसान होगा
मैं समझ जाऊँगा कि तुम
मेरे हाथों की इन लकीरें का हिस्सा बन न सकोगी
ज़िन्दगी के हर कदम में तुम मेरे साथ चल ना सकोगी 
मैं मान लूँगा कि जो स्नेह मैं तुमसे चाहता हूँ 
वो मुझे कभी मिल ना सकेगा
तुमसे गिला तो नहीं  लेकिन 
ये दिल फिर किसी से इश्क़ कर ना सकेगा ...

शनिवार, 1 मई 2021

गोविंद अब तो आ जाओ.....

                     चित्र -गूगल से साआभार

मुझमें मैं नहीं रह गया 
बस तुम ही समाये हो 
जीवन में फैली निराशा तो 
बस तुम ही याद आये हो
इस विपत्ति की घड़ी में 
गोविन्द अब तो आ जाओ
इस संकट के निकलने का 
कोई मार्ग तो सुझाओ
कितना तड़प रहें सब 
कुछ तो इसका हल बतलाओ
इस संकट की स्थिति को
गोविंद अब तुम ही निपटाओ
हर क्षण खत्म हो रहे जीवन में
आशा की एक किरण दिखाओ 
तिल -तिल मरते लोगों को 
तुम जीवन दान का उपहार दे जाओ 
मृत्यु के तांडव को रोककर 
उम्मीदों के की नाव चलाओ
सब को उसमें बैठाकर तुम 
इस संकट से पार लगाओ 
अब मत देर करो गोविन्द 
बस जल्दी से आ जाओ 
निस्तेज हो रहे जीवन को 
तुम अपने तेज से भर जाओ...

मरती इंसानियत

                                       चित्र -गूगल से साआभार "डॉक्टर मेरी मम्मी की हालत बहुत खराब है प्लीज एडमिट कर लीजिए&q...