शनिवार, 23 अप्रैल 2022

लहरें



इन लहरों की ही तरह 
एक दिन मैं भी आजाद 
हो जाऊँगी
तुम कैद करते रहना मुझे 
मैं इन किनारों को 
ही तोड़ जाऊँगी
तुम्हारे हिस्से में 
टूटी जंजीरे आयेगी
मेरी हिस्से में 
आजादी की तस्वीरें 
तुम्हारी किस्मत में 
बिखरी हुई रेत 
मेरे लिये अथाह 
सागर खड़ा है देख....

13 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 27 अप्रैल 2022 को लिंक की जाएगी ....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
    !

    अथ स्वागतम् शुभ स्वागतम्

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  2. जो उन्मुक्त हवा में उड़ने के लिए दृढ संकल्पित हो, उसे कोई कैसे कैद रख सकता है?

    जवाब देंहटाएं

प्रेम पत्र

मुझे एक प्रेम पत्र लिखना है इन पड़े-पौधों के लिए लहराती सी इस घास के लिए  इठलाते से इस झरने के लिए  ठंडी सी इस पुरवाई के लिए  इन...