शुक्रवार, 10 दिसंबर 2021

रहस्यात्मक होना अवाश्यक है....

खुली किताब सी नहीं है मेरी जिंदगी 
मैं हमेशा अपने आस-पास एक रहस्यमय
औरा बरकरार रखती हूँ 
मुझे पसन्द है ऐसे जीना कि 
कोई मुझे समझने की एक नाकाम 
कोशिश करे और फिर 
खाली हाथ लौट जाये जिससे 
उसे महसूस हो कि 
इतना आसान कैसे हो सकता है 
एक ऐसी लड़की को समझना जो 
कहानी कविताओं और उपन्यासों 
से घिरी रहती है
कभी-कभी मुझे लगता है कि 
यू रहस्यों को बरकरार रखना 
व्यक्तित्व को कितना आकर्ष बना देता है
ये रहस्यों को बरकरार रखने की कला 
तुमसे ही सीखी है मैंनें.. लेकिन 
मैं अब तक मैं तुम्हें ही नहीं समझ पाई..... 

19 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" रविवार 12 दिसम्बर 2021 को साझा की गयी है....
    पाँच लिंकों का आनन्द पर
    आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार(12-12-21) को अपने दिल के द्वार खोल दो"(चर्चा अंक4276)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है..आप की उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी .
    --
    कामिनी सिन्हा

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  3. वाह! बहुत खूब !
    उम्दा अभिव्यक्ति।

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  4. वाह!क्या खूब लिखा बहुत ही शानदार

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  5. यह जीवन एक रहस्य ही तो है, हम यहाँ क्यों हैं, कब तक हैं कुछ भी तो ज्ञात नहीं है, नींद भी एक रहस्य है और मृत्यु भी...

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  6. रहस्य ही सृजन का स्त्रोत है |कुछ प्रश्नों का उतर ना मिलना ही सही रहता है | हार्दिक शुभकामनाएं प्रिय प्रीति जी |

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रहस्यात्मक होना अवाश्यक है....

खुली किताब सी नहीं है मेरी जिंदगी  मैं हमेशा अपने आस-पास एक रहस्यमय औरा बरकरार रखती हूँ  मुझे पसन्द है ऐसे जीना कि  कोई मुझे समझ...