होगा कुछ यू एक दिन कि
तुम तक कोई नहीं पहुँच पायेगा
जो तुम नजदीक आते लोगो से
दूर भाग जाते हो वो
तुमको सच में बहुत दूर ले जायेगा
तरसते रह जाओगे किसी की आहट को
दिल के सूने दरवाजे पर भी
कोई नहीं खट-खटायेगा
जो बार - बार मायूस हुआ है वो
फिर कभी लौटकर नहीं आयेगा
जब तुम देर -सवेर मन के दरवाजे खोलोगे
तो सन्नाटा ही पाओगे
ये जो तुम्हारी भागने की आदत है ना
एक दिन तुम सच में बहुत पछताओगे..
ये जो तुम्हारी भागने की आदत है ना
जवाब देंहटाएंएक दिन तुम सच में बहुत पछताओगे..
सच्चाई तो अपना रंग दिखाई हो है।
सुंदर रचना।
सुन्दर
जवाब देंहटाएंहो सकता है सन्नाटे में भी कोई राज छुपा हो
जवाब देंहटाएंआपने यह कविता पढ़कर मुझे रिश्तों की एक सच्ची बात समझ आई। जब कोई इंसान लोगों से बार-बार दूर भागता है, तो धीरे-धीरे लोग भी उससे दूर हो जाते हैं। अगर हम लोगों को बार-बार मायूस करते हैं, तो एक समय बाद वे लौटकर नहीं आते।
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