मंगलवार, 30 मार्च 2021

बारिश


बारिश की गिरती बूँदों में 

तुम मुझे सुनाई पड़ते हो 

घनघोर रात के अँधेरें में 

तुम मुझे दिखाई पड़ते हो 

कैसे भूलू उन वादों को 

जो तूने ही सब तोड़ दिये

कैसे निकलूँ उन यादों से

जिनको तुम तो हो भूल चले 

ये बारिश की गिरती बूँदे

फिर से वैसे ही बरस रही 

जैसे बरसी थी पिछले बरस 

इस बार तेरे लिए तरस रही.. 


11 टिप्‍पणियां:

  1. बेवफा की भी किस कदर याद आती है
    बारिश में भी उसकी तस्वीर उभर आती है ...

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  2. यादों से उलझते मन का प्रीत राग प्रिय प्रीति जी। लिखती रहिये। ढेरों शुभकामनाएँ।

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  3. सुंदर। ऐसे ही लिखती रहो। बहुत अच्छा ब्लॉग है। आपको ढेरों शुभकामनाएँ।

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