चित्र- गूगल साआभार
तुमने प्रेम में अभिव्यकित चुनी
और मैंने चुना मौन हो जाना
तुमने मेरे साथ जोर-जोर हँसना चुना
और मैंनें तुमको हँसते देख मुस्कराना
तुम हमेशा अपने आँसू छुपाते रहे
और मैंने तुम्हारे कन्धें पर आँसू बहाना
फिर एक दिन तुमने मेरे जीवन से जाना चुना
और मैंनें तुम्हारी यादों संग मर जाना
तुमने कभी पलटकर मेरी तरफ ना देखना चुना
और मैंनें बस तुम्हारी राह तकना...
लाजवाब
जवाब देंहटाएंसुन्दर
जवाब देंहटाएंVery Nice Post....
जवाब देंहटाएंWelcome to my blog for new post....
प्रेम की खामोशी और बिछड़ने की पीड़ा को बहुत सच्चाई से व्यक्त किया है। हर पंक्ति दिल के किसी कोने को छू जाती है और अनकहे भावों को शब्द दे देती है। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.
जवाब देंहटाएंअधिक जानकारी आपको यहाँ मिल जाएगी - HindiDiscussionForum dot com
धन्यवाद!